लखनऊ खबर | Lucknow Khabar Political Report
लखनऊ / हरदोई: उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष Aparna Yadav ने हरदोई दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत में प्रतीक यादव के तलाक से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट पर पूछे गए सवालों का बेहद संक्षिप्त और स्पष्ट जवाब दिया। उन्होंने साफ कहा कि यह पूरी तरह व्यक्तिगत मामला है, इसलिए वह इस विषय पर टिप्पणी करने से बच रही हैं।
हरदोई में एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचीं अपर्णा यादव से जब मीडिया ने पूछा कि सोशल मीडिया पर यह मुद्दा छाया हुआ है, फिर भी वह प्रतिक्रिया क्यों नहीं दे रहीं, तो उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा—
“आपने खुद ही कहा है कि सवाल व्यक्तिगत है, इसलिए मैं इससे बच रही हूं।”
उनका यह बयान अब सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तेजी से चर्चा का विषय बन गया है।
⚖️ धार्मिक और प्रशासनिक मामलों पर जांच को बताया सही रास्ता
मीडिया बातचीत के दौरान अपर्णा यादव ने शंकराचार्य से जुड़े विवाद पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में चार शंकराचार्यों की व्यवस्था आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित की गई है, और यह एक तथ्यात्मक विषय है कि किसी व्यक्ति के पास शंकराचार्य की उपाधि है या नहीं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल इस विषय से जुड़े तथ्य उनके सामने उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए वह किसी की वैधता या अवैधता पर सवाल नहीं उठा रहीं।
🛑 ‘कोई भी संविधान से ऊपर नहीं’
अपर्णा यादव ने कहा कि यदि कुंभ या किसी अन्य सनातन मेले के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था में कमी पाई जाती है, तो वह जांच का विषय होना चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा—
“कोई भी व्यक्ति संविधान से ऊपर नहीं है। कानून-व्यवस्था सबके लिए समान है।”
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री के लिए इस तरह की भाषा का प्रयोग करना उचित नहीं है और छींटाकशी से बचना चाहिए।
🧘♂️ संतों को संयम रखना चाहिए
Swami Avimukteshwaranand को लेकर पूछे गए सवाल पर अपर्णा यादव ने कहा कि संत समाज से संयम और मर्यादा की अपेक्षा की जाती है।
उन्होंने कहा कि संतों को गुस्से या तीखी टिप्पणियों से बचना चाहिए और तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए।
🚨 मुरादाबाद बुर्का प्रकरण पर सख्त रुख
मुरादाबाद में हिंदू लड़की को बुर्का पहनाए जाने की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए अपर्णा यादव ने कहा कि इस मामले में एफआईआर दर्ज होनी चाहिए और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि महिला की गरिमा और स्वतंत्रता से जुड़ा कोई भी मामला गंभीर है और उस पर कानून के अनुसार कार्रवाई जरूरी है।


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