लखनऊ खबर | Lucknow Khabar Governance & Urban Development Report
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में घर या दुकान बनाने की योजना बना रहे लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब नक्शा पास कराने की प्रक्रिया पहले से ज्यादा सरल और पारदर्शी होने जा रही है। योगी सरकार शहरों में अवैध निर्माण पर लगाम लगाने के लिए नक्शा मंजूरी की व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रही है।
अब विकास प्राधिकरण की सीमा में जिला पंचायतें नक्शा पास नहीं करेंगी। वहीं, जहां विकास प्राधिकरण नहीं है, वहां नगर निगम और अन्य नगर निकायों को यह अधिकार दिया जाएगा।
🏗️ क्यों बदली जा रही है व्यवस्था?
अब तक कई जिलों में जिला पंचायतें विकास प्राधिकरण की महायोजना के बावजूद नक्शा पास कर रही थीं, जिससे अनियोजित विकास और अवैध निर्माण बढ़ रहा था।
विकास प्राधिकरणों ने इन नक्शों पर आपत्तियां भी जताई थीं। इसी को लेकर Yogi Adityanath ने आवास, नगर विकास और पंचायती राज विभाग के साथ उच्चस्तरीय बैठक बुलाई।
मुख्यमंत्री को बताया गया कि मौजूदा व्यवस्था में दोहरी मंजूरी, भ्रम और भ्रष्टाचार की आशंका बनी रहती है।
🧾 अब कौन देगा नक्शे की मंजूरी? (नई व्यवस्था)
मुख्यमंत्री के निर्देश के अनुसार—
-
🏙️ विकास प्राधिकरण सीमा के भीतर
👉 केवल विकास प्राधिकरण नक्शा पास करेगा -
🏘️ जहां विकास प्राधिकरण नहीं है
👉 नगर निगम, नगर पालिका और अन्य नगर निकाय नक्शा मंजूर करेंगे -
❌ जिला पंचायतों का अधिकार सीमित
👉 उन्हें भवन विकास उपविधि के अनुसार ही काम करना होगा
मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि शहरी सीमा में विकास प्राधिकरण ही सक्षम प्राधिकरण है।
⚙️ पारदर्शी सिस्टम के लिए नया मॉड्यूल
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि:
-
Uttar Pradesh Housing Department जल्द एक कार्ययोजना (Action Plan) तैयार करे
-
नगर विकास विभाग, विकास प्राधिकरणों के ऑनलाइन नक्शा पास मॉड्यूल का अध्ययन करे
-
जरूरत पड़ने पर नियमों में संशोधन भी किया जाए
इस कार्ययोजना का मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुतीकरण जल्द किया जाएगा।
🏠 आम जनता को क्या फायदा होगा?
नई व्यवस्था से:
-
नक्शा पास कराने में कम समय लगेगा
-
एक ही विभाग से मंजूरी, भटकना खत्म
-
ऑनलाइन और ट्रैकिंग आधारित सिस्टम
-
अवैध निर्माण पर प्रभावी रोक
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि आवासीय और व्यावसायिक नक्शा पास कराने में लोगों को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए।
⚖️ बैठक में लिए गए अन्य बड़े फैसले
इसी बैठक में राज्य सरकार ने कुछ और अहम निर्णय भी लिए—
♿ दिव्यांगजनों को पदोन्नति में आरक्षण
-
सिविल जज (सीनियर डिवीजन) पदों पर पदोन्नति में
-
दिव्यांगजनों को 4% आरक्षण का फैसला
⚖️ पीसीएस-जे भर्ती से जुड़े नए नियम
-
पीसीएस-जे भर्ती के लिए 3 साल की वकालत अनिवार्य
-
हिंदी भाषा का अच्छा ज्ञान जरूरी
इस संबंध में अधिसूचना प्रमुख सचिव नियुक्ति एम. देवराज द्वारा जारी कर दी गई है।


Leave a Reply