उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow के Malihabad में एक बेहद भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक मां की 16 साल की इंतजार भरी पीड़ा उस वक्त खत्म हो गई, जब उसका लापता बेटा अचानक घर लौट आया।
बेटे को देखते ही मां की आंखों से आंसुओं की झड़ी लग गई और दोनों गले लगकर रो पड़े। परिवार के लोग भी इस दृश्य को देखकर भावुक हो गए।
मजदूरी करने निकला था, फिर कभी लौटा नहीं
मलिहाबाद क्षेत्र के रूसेना खेड़ा गांव के रहने वाले 44 वर्षीय शिवनाथ करीब 16 साल पहले मजदूरी करने घर से निकले थे।
वह एक साथी के साथ काम की तलाश में Muzaffarnagar पहुंचे थे, जहां उन्होंने कुछ समय तक मजदूरी की।
लेकिन मजदूरी के पैसे नहीं मिलने पर वे वहां से निकल गए और बाद में Meerut पहुंच गए।
भैंसों के तबेले में बना लिया बंधक
शिवनाथ का आरोप है कि मेरठ में एक व्यापारी ने उन्हें अपने यहां भैंसों के तबेले में काम करने के लिए बंधक बना लिया।
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उनसे दिन-रात काम कराया जाता था
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दूध निकालने से लेकर गोबर उठाने तक का काम
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मजदूरी के पैसे भी नहीं दिए जाते थे
इस दौरान वह अपने घर लौटने की कोशिश भी नहीं कर पा रहे थे।
साथी ने दी मदद, ऐसे भागकर पहुंचे घर
शिवनाथ ने बताया कि उनके साथ काम करने वाले हरदोई के एक युवक रिंकू ने उनकी हालत देखकर मदद की।
उसने उन्हें 500 रुपये दिए, जिसके बाद शिवनाथ ने वहां से भागने का फैसला किया।
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रात में दीवार फांदकर बाहर निकले
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मेरठ रेलवे स्टेशन पहुंचे
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ट्रेन से Alamnagar पहुंचे
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फिर पैदल अपने गांव पहुंच गए
रविवार दोपहर जैसे ही वह घर पहुंचे, परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
पिता बेटे के इंतजार में दुनिया छोड़ गए
परिवार के मुताबिक, जब शिवनाथ काफी समय तक वापस नहीं आए तो उनके पिता उन्हें खोजने के लिए कई जगह गए।
लेकिन उनका कोई पता नहीं चला और बेटे की याद में पिता की मौत हो गई।
मां कलावती देवी और भाई वीरेंद्र कुमार ने आखिरकार मान लिया था कि शिवनाथ अब इस दुनिया में नहीं रहे।
अब कानूनी कार्रवाई की तैयारी
शिवनाथ के भाई वीरेंद्र कुमार ने कहा कि अब जब उनका भाई वापस आ गया है, तो परिवार इस मामले में शिकायत दर्ज कराएगा।
उन्होंने बताया कि गांव के प्रतिनिधियों के साथ थाने जाकर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी।
वहीं Rahimabad पुलिस का कहना है कि अभी तक इस मामले की आधिकारिक शिकायत थाने में नहीं आई है।
❤️ मां की पुकार आखिर सुन ली किस्मत ने
16 साल बाद बेटे की वापसी ने पूरे गांव को भावुक कर दिया।
जिस बेटे को परिवार ने मृत मान लिया था, वह अचानक सामने खड़ा था।
मां की आंखों में आंसू थे, लेकिन इस बार दर्द के नहीं, खुशी के।
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