लखनऊ खबर | Lucknow Khabar Political Ground Report
लखनऊ: राजधानी लखनऊ में गुरुवार को नगर निगम मुख्यालय के बाहर उस वक्त हालात बेकाबू हो गए, जब बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर लगी होर्डिंग को कथित तौर पर कूड़े में फेंके जाने के आरोप में बहुजन संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया।
आरोप है कि नगर निगम के जोन-6 द्वारा Azad Samaj Party (कांशीराम) और Bhim Army की होर्डिंग्स हटाई गईं, जिन पर अंबेडकर और अन्य बहुजन महापुरुषों के चित्र थे। इसी के विरोध में कार्यकर्ताओं ने नगर निगम का घेराव कर दिया।
🚨 महापौर की गाड़ी के सामने लेट गए कार्यकर्ता
स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ता महापौर की गाड़ी के सामने लेट गए। बताया जा रहा है कि ड्राइवर ने गाड़ी आगे बढ़ाने की कोशिश की, जिससे दो कार्यकर्ता बाल-बाल बचे। सुरक्षा कर्मियों ने तत्काल हस्तक्षेप कर हालात संभाले।
हंगामे के कारण महापौर को अपनी गाड़ी छोड़कर वापस कार्यालय लौटना पड़ा।
🚌 पुलिस बुलाई गई, बस से ले जाए गए कार्यकर्ता
नगर निगम अधिकारियों को स्थिति काबू में करने के लिए पुलिस बुलानी पड़ी। प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए परिवहन निगम की बस मंगाई गई, लेकिन कार्यकर्ता हटने को तैयार नहीं थे। काफी देर तक नारेबाजी और धक्का-मुक्की चलती रही।
📄 ज्ञापन को लेकर भी विवाद
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे शांतिपूर्वक महापौर को ज्ञापन देने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें मिलने नहीं दिया गया।
जिलाध्यक्ष अजय भारती वार्ता के लिए महापौर कार्यालय पहुंचे, मगर बातचीत बेनतीजा रही। इसके बाद कार्यकर्ता दोबारा बाहर आकर विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए।
🗣️ ‘बाबा साहब का अपमान बर्दाश्त नहीं’
अजय भारती ने आरोप लगाया कि होर्डिंग्स को जानबूझकर निशाना बनाया गया और कूड़े में फेंककर बहुजन समाज का अपमान किया गया।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन और तेज होगा।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी सवाल उठाया कि शहर में अन्य राजनीतिक दलों की होर्डिंग्स सुरक्षित क्यों रहीं, जबकि सिर्फ उनकी पार्टी को हटाया गया।
🏛️ महापौर का जवाब
उधर, महापौर ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि होर्डिंग्स अवैध तरीके से लगाई गई थीं, इसलिए नियमों के तहत कार्रवाई की गई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी दल के साथ भेदभाव नहीं किया गया है।
⚖️ सियासी तापमान बढ़ा
यह मामला अब केवल होर्डिंग हटाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बहुजन सम्मान और प्रशासनिक कार्रवाई के मुद्दे पर राजनीतिक रंग ले चुका है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है।


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