Beyond Delhi–Mumbai! Lucknow, Indore & Surat Emerge as New Real Estate Powerhouses_Pic Credit Google

दिल्ली–मुंबई को टक्कर देंगे ये छोटे शहर! लखनऊ, इंदौर और सूरत बनेंगे रियल एस्टेट के नए ‘पावरहाउस’

लखनऊ खबर | Lucknow Khabar Real Estate & Economy Special

लखनऊ: भारत का रियल एस्टेट ग्रोथ मॉडल अब सिर्फ दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जैसे मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं रहा। बजट 2026–27 के बड़े ऐलानों के बाद इंदौर, लखनऊ और सूरत जैसे टियर-2 और टियर-3 शहर देश के नए रियल एस्टेट ‘पावरहाउस’ बनकर उभर रहे हैं। बेहतर कनेक्टिविटी, रिस्क फंड और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश ने इन शहरों को विकास की दौड़ में मेट्रो शहरों के बराबर ला खड़ा किया है।


🏙️ बजट 2026–27 से खुले नए रास्ते

वित्त मंत्री द्वारा सरकारी संपत्तियों के मुद्रीकरण, बुनियादी ढांचे में निवेश और ग्रोथ कॉरिडोर पर दिए गए जोर का सीधा फायदा छोटे शहरों को मिल रहा है।
बजट में टियर-2 और टियर-3 शहरों के शहरी आर्थिक क्षेत्रों (Urban Economic Zones) और कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दी गई है, जिससे:

  • बड़े कॉर्पोरेट ऑफिस

  • लॉजिस्टिक्स हब

  • कमर्शियल और प्रीमियम रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स

अब इन शहरों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।


🚧 कनेक्टिविटी ने बदली तस्वीर

एक्सप्रेसवे, रिंग रोड और क्षेत्रीय हवाई अड्डों के विस्तार ने इन शहरों की पहुंच को आसान बना दिया है।

  • Lucknow – पूर्वांचल और अवध का रियल एस्टेट हब

  • Indore – कॉमर्शियल और आईटी निवेश का नया केंद्र

  • Surat – इंडस्ट्रियल और वेयरहाउसिंग पावरहाउस

कम जमीन और लेबर लागत के कारण यहां Return on Investment (ROI) मेट्रो शहरों से बेहतर माना जा रहा है।


👨‍💼 वर्क-फ्रॉम-होम का असर, बढ़ी प्रीमियम हाउसिंग

महामारी के बाद बड़ी संख्या में कुशल वर्कफोर्स अपने होमटाउन लौटी, जिससे इन शहरों में:

  • प्रीमियम फ्लैट्स

  • गेटेड टाउनशिप

  • हाई-एंड सोसाइटीज़

की मांग तेजी से बढ़ी है।


💰 REITs और रिस्क फंड से मिलेगी रफ्तार

पहले छोटे शहरों के प्रोजेक्ट्स फंडिंग की कमी से जूझते थे, लेकिन अब:

  • REITs (Real Estate Investment Trusts) के जरिए

  • म्यूचुअल फंड और विदेशी निवेशकों का पैसा

इन शहरों में आ रहा है।
सरकार समर्थित रिस्क फंड सूरत जैसे शहरों में बड़े कमर्शियल और वेयरहाउसिंग प्रोजेक्ट्स को गति देंगे।


☁️ डेटा सेंटर हब बनेंगे लखनऊ और इंदौर

2047 तक विदेशी क्लाउड कंपनियों को दी गई Tax Holiday का सबसे बड़ा फायदा छोटे शहरों को मिल सकता है।
CBRE के अनुसार, इससे Global Capital Inflow बढ़ेगा और नोएडा के बाद लखनऊ और इंदौर डेटा सेंटर हब के रूप में उभर सकते हैं।

CBRE के चेयरमैन Anshuman Magazine का मानना है कि यह छूट हाई-टेक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए गेम-चेंजर साबित होगी।


🏢 डेवलपर्स की राय

शालीमार कॉर्प के डायरेक्टर Khalid Masood कहते हैं:

“बजट में टियर-2 और टियर-3 शहरों पर दिया गया फोकस देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देगा और रियल एस्टेट सेक्टर के लिए नए विकास मार्ग खोलेगा।”


⚠️ दूसरा पहलू: सस्ते घरों की घटती हिस्सेदारी

जहां एक ओर बड़े प्रोजेक्ट्स की रफ्तार तेज है, वहीं Affordable Housing चिंता का विषय बन रही है।
Anarock के आंकड़ों के मुताबिक:

  • 2019 में सस्ते घरों की हिस्सेदारी: 38%

  • अब घटकर: 18%

लखनऊ और इंदौर जैसे शहरों में भी मध्यम वर्ग के लिए घर खरीदना मुश्किल होता जा रहा है।


🔮 निष्कर्ष: छोटे शहर, बड़ा भविष्य

बजट 2026–27 ने साफ कर दिया है कि भारत का अगला शहरी विस्तार टियर-2 शहरों के कंधों पर टिका है।
अगर सरकार सस्ते घरों के लिए Interest Subvention जैसी योजनाएं लाती, तो यह विकास और भी समावेशी हो सकता था।
फिर भी, बेहतर कनेक्टिविटी और बड़े निवेश के दम पर इन शहरों की ‘सूरत’ बदलना अब तय माना जा रहा है।


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