लखनऊ खबर | Lucknow Khabar Policy & Education Report
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में 16 साल के किशोरों को ड्राइविंग लाइसेंस देने का मुद्दा अचानक चर्चा के केंद्र में आ गया। राज्य सरकार ने 16–18 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को सीमित श्रेणी के वाहनों के लिए लाइसेंस देने को लेकर केंद्र सरकार से अनुमति मांगी है।
परिवहन मंत्री Dayashankar Singh ने सदन में बताया कि यह प्रस्ताव केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम के तहत आता है, इसलिए अंतिम निर्णय केंद्र सरकार को लेना होगा।
🏍️ कैसे शुरू हुई बहस?
चित्रकूट से सपा विधायक Anil Pradhan ने सवाल उठाया कि इंटरमीडिएट पास करने वाले कई छात्रों की उम्र 15–16 वर्ष होती है। ऐसे में अगर सरकार मेधावी छात्राओं को स्कूटी दे रही है, तो कम उम्र के छात्रों को लाइसेंस देने के नियमों में बदलाव होगा या नहीं?
इस पर मंत्री ने कहा कि पहले 16 वर्ष की उम्र में 50 सीसी तक के वाहनों के लिए लाइसेंस मिलता था, लेकिन ऐसे वाहनों का उत्पादन बंद होने से यह व्यवस्था खत्म हो गई। अब इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते चलन के कारण नई संभावनाएं बनी हैं।
⚡ इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए नया प्रावधान?
सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित बदलावों में:
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1500 वॉट तक के हल्के इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए
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16–18 वर्ष आयु वर्ग को लर्नर लाइसेंस देने पर विचार
हालांकि यह तभी संभव होगा जब Government of India मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन करे।
🎓 रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना से जुड़ा मामला
हाल ही में योगी सरकार ने बजट में ‘रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना’ के तहत मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने के लिए ₹400 करोड़ का प्रावधान किया है।
इस योजना का उद्देश्य छात्राओं की शिक्षा और सुरक्षित आवागमन को बढ़ावा देना है।
लेकिन इसी के साथ सड़क सुरक्षा, कम उम्र में ड्राइविंग और कानूनी प्रावधानों पर नई बहस शुरू हो गई है।
🚦 सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती
अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो:
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16 साल के किशोर सीमित क्षमता वाले वाहन चला सकेंगे
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युवाओं को सुविधा मिलेगी
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लेकिन सड़क सुरक्षा और नियमों का सख्त पालन जरूरी होगा
सरकार फिलहाल केंद्र की मंजूरी का इंतजार कर रही है।


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