झांसी (उत्तर प्रदेश): मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आयोजित झांसी के सामूहिक विवाह समारोह में 283 जोड़ों की शादी हुई — लेकिन इस भव्य आयोजन के पीछे की सच्चाई चौंकाने वाली है।
कई जोड़ों ने न तो सात फेरे लिए, न ही दुल्हन की मांग में सिंदूर भरा गया, फिर भी उन्हें “विवाहित” घोषित कर दिया गया।
💰 सरकारी लाभ के लालच में रचाई गई ‘फर्जी’ शादियां
सूत्रों के अनुसार, योजना के तहत मिलने वाली ₹1 लाख की सहायता राशि (₹60,000 नकद और ₹25,000 के सामान सहित) पाने के लालच में कई जोड़ों ने दिखावटी शादी कर ली।
यहां तक कि 7 से 8 जोड़े ऐसे थे जिनकी असली शादी पहले ही हो चुकी थी, लेकिन उन्होंने फिर से विवाह रचा ताकि सरकारी लाभ मिल सके।
👰♀️ रस्मों का मज़ाक — न फेरे, न सिंदूर
दुल्हन नेहा राजपूत ने बताया,
“पंडित जी ने न ही मांग भराई, न ही फेरे लगवाए। बस फोटो खिंचवाकर हमें विदा कर दिया गया।”
दूसरी ओर, जब रुचि और राहुल जैसे जोड़ों से सवाल पूछे गए, तो वे मौके से भाग गए।
पंडित सत्यम सोनाकिया ने स्वीकार किया कि कुछ शादियां अधूरी रह गईं — “कुछ जोड़े आधे में भाग गए, आधों की रस्में पूरी हुईं।”
🧾 दोबारा शादी करने वाले जोड़े भी शामिल
अशोक और रजनी नामक जोड़े का 11 मई 2025 की तारीख वाला शादी का कार्ड सामने आया, जिससे खुलासा हुआ कि उन्होंने पहले ही विवाह कर लिया था।
जब मीडिया ने सवाल किया, तो परिजन पहले तो इंकार करते रहे, बाद में कार्ड दिखने पर चुप हो गए।
🏛️ प्रशासन का दावा, सब नियमों के अनुसार
जिला समाज कल्याण अधिकारी ललिता यादव ने कहा —
“यह योजना गरीब परिवारों के लिए वरदान है। सभी शादियां नियमों के अनुसार कराई जा रही हैं।”
हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स सामने आने के बाद आनन-फानन में अधूरी रस्में पूरी कराई गईं, लेकिन कई जोड़े तब तक समारोह स्थल से जा चुके थे।
📌 मुख्य बातें:
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मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत 283 जोड़ों की शादी
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कई जोड़ों ने बिना फेरे और सिंदूर के शादी की रस्में निभाईं
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सरकारी लाभ पाने के लिए कुछ जोड़ों ने दोबारा शादी की
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मीडिया के सवाल पर कई दूल्हे-दुल्हन भाग खड़े हुए
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प्रशासन ने दावा किया कि सब कुछ “नियमों के अनुसार” हुआ


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