Missing Son Returns Home After 16 Years in Lucknow, Mother Breaks Down in Emotional Reunion_Pic Credit Google

‘मरा समझकर छोड़ दी थी उम्मीद’; बेटे को देखते ही मां की आंखों से आंसुओं की झड़ी, 16 सालों की टीस हुई खत्म लखनऊ की कलावती को आखिरकार उनका बेटा मिल गया। बेटे को उनलोगों ने मरा समझकर मिलने की उम्मीद छोड़ दी थी। ईश्वर ने मां की पुकार आखिरकार सुन ली। लखनऊ: मां के लिए पुत्र हमेशा बच्चा रहता है, चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों न हो जाए। अगर वह बिछड़ता है और फिर मां के सामने आता है तो फिर भावनाओं का तूफान उमड़ने लगता है। कुछ ऐसा ही उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद में देखने को मिला। 16 साल से लापता बेटा जैसे ही अपने घर पहुंचा। उसे देखते ही मां और भाई की भावनाएं आंखों से बह निकली। तीनों आपस में लिपटकर खूब रोए। मां ने बेटे को मृत मानकर दिल पर पत्थर रख लिया था। लेकिन, बेटे को सामने देखकर खुशी इतनी हुई कि उन्हें देखने वाले लोग भी भावुक हो गए। क्या है पूरी घटना? मलिहाबाद के रहने वाले 44 वर्षीय शिवनाथ रविवार दोपहर अचानक अपने घर पहुंचे। वह 16 साल पहले घर से मजदूरी करने के लिए निकले थे। घर से ऐसे गए, वापस ही नहीं लौटे। महीने-साल गुजरते गए। परिवार इंतजार करता रहा। मां कलावती देवी और भाई वीरेंद्र कुमार उनका इंतजार करते रहे। पिता ने बेटे की याद में अंतिम सांस ले ली। मां-भाई ने मान लिया था कि शिवनाथ अब इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन, रविवार को वे अचानक घर लौट आए। शिवनाथ ने बताया कि वह मजदूरी करने घर से निकले थे। इसी क्रम में मेरठ में एक व्यापारी ने उन्हें भैंसों के तबेले में काम करने के लिए बंधक बना लिया था। वह उन्हें रुपये भी नहीं देते थे। शिवनाथ के गायब होने के बाद लोगों ने मरा मानकर थाने में रिपोर्ट तक नहीं दर्ज कराई थी। शिवनाथ ने बताई पूरी कहानी रहीमाबाद के रूसेना खेड़ा गांव के रहने वाले शिवनाथ करीब 16 साल पहले घर से निकले थे। हरदोई के एक साथी के साथ वे मजदूरी करने मुजफ्फरनगर पहुंचे। वहां उन्होंने एक ठेकेदार के पास दो माह तक काम किया। दिहाड़ी नहीं मिलने पर वहां से शिवनाथ भाग निकले। मेरठ में टोल के पास शिवाया गांव के राजेंद्र चौधरी उन्हें अपने साथ ले गए। शिवनाथ का आरोप है कि राजेंद्र चौधरी का बेटा राहुल चौधरी ने उन्हें बंधक बना लिया। मजदूरी के रुपये भी नहीं देता था। भैंसों के दूध निकालने से लेकर गोबर उठाने तक का काम उनसे कराया जाता था। ऐसे हुए फरार शिवनाथ ने बताया कि उनके साथ हरदोई का रिंकू भी काम करता था। वह शिवनाथ को घर जाने के लिए रोता देखता था। उसने रहम करके शिवनाथ को 500 रुपये दिए। इसके बाद शिवनाथ ने वहां से भागने का फैसला किया। घर की दीवार फांदकर वे मेरठ रेलवे स्टेशन पहुंचे। ट्रेन से वे आलमनगर स्टेशन पहुंचे। इसके बाद रविवार को पैदल वे अपने घर वापस पहुंचे। भाई ने कहा, केस करेंगे शिवनाथ के भाई वीरेंद्र कुमार का कहना है कि हमारा भाई वापस आ गया है, हमलोग काफी खुश हैं। घर में त्योहार जैसा माहौल है। मां कलावती की पुकार भगवान ने सुन ली। उन्होंने कहा कि भाई जब काफी समय तक नहीं लौटे तो पिता परमेश्वर उन्हें खोजने मुजफ्फरनगर गए थे। वहां शिवनाथ नहीं मिले। इसके बाद रहीमाबाद चौकी में शिकायत की गई, लेकिन कोई पता नहीं चला। भाई ने कहा कि हमलोगों ने तो आस ही छोड़ दी थी। उन्होंने कहा कि अब इस मामले में हम गांव के प्रतिनिधियों के साथ थाने जाकर मामले की शिकायत दर्ज कराएंगे। हालांकि, मामले को लेकर रहीमाबाद इंस्पेक्टर अरुण कुमार त्रिगुनायक का कहना है कि अभी तक इस प्रकार के मामले की कोई सूचना थाने को नहीं मिली है।

उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow के Malihabad में एक बेहद भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक मां की 16 साल की इंतजार भरी पीड़ा उस वक्त खत्म हो गई, जब उसका लापता बेटा अचानक घर लौट आया।

बेटे को देखते ही मां की आंखों से आंसुओं की झड़ी लग गई और दोनों गले लगकर रो पड़े। परिवार के लोग भी इस दृश्य को देखकर भावुक हो गए।


मजदूरी करने निकला था, फिर कभी लौटा नहीं

मलिहाबाद क्षेत्र के रूसेना खेड़ा गांव के रहने वाले 44 वर्षीय शिवनाथ करीब 16 साल पहले मजदूरी करने घर से निकले थे

वह एक साथी के साथ काम की तलाश में Muzaffarnagar पहुंचे थे, जहां उन्होंने कुछ समय तक मजदूरी की।

लेकिन मजदूरी के पैसे नहीं मिलने पर वे वहां से निकल गए और बाद में Meerut पहुंच गए।


भैंसों के तबेले में बना लिया बंधक

शिवनाथ का आरोप है कि मेरठ में एक व्यापारी ने उन्हें अपने यहां भैंसों के तबेले में काम करने के लिए बंधक बना लिया

  • उनसे दिन-रात काम कराया जाता था

  • दूध निकालने से लेकर गोबर उठाने तक का काम

  • मजदूरी के पैसे भी नहीं दिए जाते थे

इस दौरान वह अपने घर लौटने की कोशिश भी नहीं कर पा रहे थे।


साथी ने दी मदद, ऐसे भागकर पहुंचे घर

शिवनाथ ने बताया कि उनके साथ काम करने वाले हरदोई के एक युवक रिंकू ने उनकी हालत देखकर मदद की।

उसने उन्हें 500 रुपये दिए, जिसके बाद शिवनाथ ने वहां से भागने का फैसला किया।

  • रात में दीवार फांदकर बाहर निकले

  • मेरठ रेलवे स्टेशन पहुंचे

  • ट्रेन से Alamnagar पहुंचे

  • फिर पैदल अपने गांव पहुंच गए

रविवार दोपहर जैसे ही वह घर पहुंचे, परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।


पिता बेटे के इंतजार में दुनिया छोड़ गए

परिवार के मुताबिक, जब शिवनाथ काफी समय तक वापस नहीं आए तो उनके पिता उन्हें खोजने के लिए कई जगह गए।

लेकिन उनका कोई पता नहीं चला और बेटे की याद में पिता की मौत हो गई

मां कलावती देवी और भाई वीरेंद्र कुमार ने आखिरकार मान लिया था कि शिवनाथ अब इस दुनिया में नहीं रहे।


अब कानूनी कार्रवाई की तैयारी

शिवनाथ के भाई वीरेंद्र कुमार ने कहा कि अब जब उनका भाई वापस गया है, तो परिवार इस मामले में शिकायत दर्ज कराएगा।

उन्होंने बताया कि गांव के प्रतिनिधियों के साथ थाने जाकर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी।

वहीं Rahimabad पुलिस का कहना है कि अभी तक इस मामले की आधिकारिक शिकायत थाने में नहीं आई है।


❤️ मां की पुकार आखिर सुन ली किस्मत ने

16 साल बाद बेटे की वापसी ने पूरे गांव को भावुक कर दिया।
जिस बेटे को परिवार ने मृत मान लिया था, वह अचानक सामने खड़ा था।

मां की आंखों में आंसू थे, लेकिन इस बार दर्द के नहीं, खुशी के।


#Lucknow #LucknowKhabar #UttarPradesh #UttarPradeshNews #EmotionalStory #Malihabad #HumanStory


Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *