लखनऊ खबर | Lucknow Khabar Ground & Religion Report
प्रयागराज / वाराणसी: माघ मेले के दौरान संत समाज और प्रशासन के बीच जारी तनाव के बीच Swami Avimukteshwaranand Saraswati ने प्रयागराज से काशी (वाराणसी) के लिए प्रस्थान कर लिया है। रवाना होते समय उन्होंने प्रशासन पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि “हमारी अंतरात्मा को चोट पहुंची है” और मौनी अमावस्या की घटना ने उन्हें गहरा मानसिक आघात दिया है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि प्रशासन सुविधाएं देकर उन्हें संतुष्ट करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन मेला क्षेत्र में हुई मारपीट और कथित दुर्व्यवहार पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा।
⚠️ ‘सुविधाएं दिखावा हैं, सच्चाई कुछ और’
मीडिया से बातचीत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि प्रशासन की ओर से जो व्यवस्थाएं दिखाई जा रही हैं, वे केवल बाहरी दिखावा हैं।
उन्होंने कहा—
“हमें प्रलोभन और लोभ-लालच देने की कोशिश की जा रही है, लेकिन जो अन्याय हुआ, उस पर एक शब्द भी नहीं कहा गया।”
उनका कहना था कि प्रशासन की नियत अब तक स्पष्ट नहीं है और संतों व अनुयायियों के साथ हुई घटनाओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
🕯️ मौनी अमावस्या की घटना से ‘आत्मा को आघात’
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मौनी अमावस्या की घटना का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि इससे उनकी आत्मा को गहरा आघात पहुंचा है।
उन्होंने कहा कि हार-जीत का फैसला समय करेगा, लेकिन सनातन धर्म के अनुयायियों को ही यह तय करना होगा कि सही और गलत क्या है।
🛑 प्रशासन और संपत्ति विवाद पर दुख
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि प्रशासन और संपत्ति से जुड़े घटनाक्रमों ने उन्हें बेहद दुखी किया है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि Yogi Adityanath के प्रशासन के दौरान यदि सनातन धर्मियों को ठेस पहुंची है, तो यह उनके लिए सबसे बड़ा कष्ट है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस दुख की भरपाई भविष्य में कोई नेता या राजनीतिक दल कर पाएगा या नहीं, यह आने वाला समय तय करेगा, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नजर नहीं आई है।
🔔 ‘जनता और अनुयायी ही फैसला करेंगे’
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने साफ किया कि उनका उद्देश्य प्रशासन के अपराधों या असंगतियों पर बहस करना नहीं है, बल्कि संदेश देना है कि भविष्य में जनता और अनुयायी ही निर्णय करेंगे।
उन्होंने कहा कि अब माघ मेला स्थल से आगे बढ़ना आवश्यक हो गया था और उनकी प्राथमिकता सनातन धर्म, संत समाज और अनुयायियों की सुरक्षा व सम्मान है।
🚩 काशी प्रस्थान से बढ़ी हलचल
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का प्रयागराज से काशी प्रस्थान ऐसे समय में हुआ है, जब माघ मेला में सनातन धर्मियों और स्थानीय प्रशासन के बीच कई मुद्दों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। उनके इस कदम को संत समाज में एक प्रतीकात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।


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