Why Holi Is Not Celebrated for 600 Years in This UP Town – The Story Will Shock You_Pic Credit Google

यूपी का ऐसा शहर जहां 600 साल से नहीं खेली जाती होली! वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

उत्तर प्रदेश में जहां होली का त्योहार पूरे उत्साह और रंगों के साथ मनाया जाता है, वहीं Dalmau में पिछले करीब 600 वर्षों से होली नहीं मनाई जाती। यहां होली के दिन रंग-गुलाल की जगह शोक मनाने की परंपरा है।

यह अनोखी परंपरा रायबरेली जिले के इस ऐतिहासिक कस्बे में आज भी निभाई जाती है।


होली के दिन हुई थी राजा की हत्या

स्थानीय इतिहास और जनश्रुतियों के अनुसार, 15वीं सदी में Raja Daldev डलमऊ के शासक थे।

कहा जाता है कि जौनपुर के शर्की शासक Ibrahim Shah Sharqi ने होली के दिन ही धोखे से राजा डालदेव और उनके भाइयों पर हमला करवा दिया।

उस समय होली के पर्व पर हथियार न उठाने की परंपरा थी। इसी का फायदा उठाकर हमला किया गया और भीषण युद्ध में राजा डालदेव अपने भाइयों के साथ वीरगति को प्राप्त हुए।


11 दिन तक मनाया जाता है शोक

इस घटना के बाद से डलमऊ क्षेत्र में लोगों ने फैसला किया कि होली के दिन रंग नहीं खेलेंगे

  • होली के दिन से करीब एक सप्ताह से अधिक शोक रखा जाता है

  • इसके बाद ही लोग त्योहार मनाते हैं

  • यानी होली लगभग एक हफ्ते बाद खेली जाती है

स्थानीय मान्यता के अनुसार, यह परंपरा राजा डालदेव की स्मृति में निभाई जाती है।


आज भी मौजूद है स्मारक

डलमऊ से करीब 4 किलोमीटर दूर Pakhrauli गांव में राजा डालदेव और उनके भाई बालदेव का स्मारक बना हुआ है।

यहां हर साल सावन महीने में स्थानीय लोग श्रद्धा से दूध चढ़ाकर उन्हें याद करते हैं।


इस साल कब मनाई जाएगी होली

डलमऊ में होली के दिन रंग नहीं खेला जाता।
परंपरा के अनुसार होली के लगभग एक सप्ताह बाद पहला शुभ दिन आने पर त्योहार मनाया जाता है।

इस वर्ष डलमऊ क्षेत्र में 29 मार्च को होली खेलने की परंपरा निभाई जाएगी।


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