उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow में एलपीजी गैस की किल्लत अब धार्मिक आयोजनों पर भी असर डालने लगी है। नवरात्र के बाद होने वाले भंडारों में इस बार आयोजकों को खाद्यान्न नहीं, बल्कि गैस सिलेंडर की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ रही है।
🔥 क्या है पूरा मामला?
- भंडारे के लिए आमतौर पर 4–5 सिलेंडर की जरूरत
- इस बार एक सिलेंडर जुटाना भी मुश्किल
- श्रद्धालुओं से आटा-चावल नहीं, बल्कि सिलेंडर दान की अपील
👉 कई जगह अब मजबूरी में लकड़ी की भट्ठी पर खाना बन रहा है
📍 सबसे ज्यादा असर कहां?
👉 Banthra और आसपास के क्षेत्र
👉 जहां हर साल हजारों लोगों के लिए भंडारे होते हैं
⚠️ संकट की बड़ी वजह
- घरेलू एलपीजी की सीमित सप्लाई
- कॉमर्शियल सिलेंडर की भारी कमी
- डिलीवरी सिस्टम पर दबाव
📊 आंकड़े बताते हैं:
- बैकलॉग: 1.60 लाख से ज्यादा
- सिर्फ Indane का बैकलॉग: 1.04 लाख
🚚 डिलीवरी सिस्टम भी फेल
- गैस एजेंसियों के पास हॉकर कम
- बुकिंग लगातार बढ़ रही
- ऐप और कॉल सेंटर पर भी भारी दबाव
👉 कई जगह 7 दिन से ज्यादा की वेटिंग
🗣️ आयोजकों की परेशानी
आयोजक प्रदीप यादव के अनुसार:
- लोग आटा, चावल दे रहे हैं
- लेकिन गैस नहीं मिलने से खाना बनाना मुश्किल
- पहली बार सिलेंडर दान की अपील करनी पड़ी
📌 निष्कर्ष
👉 एलपीजी संकट अब सिर्फ घरेलू समस्या नहीं, बल्कि
👉 धार्मिक और सामाजिक आयोजनों को भी प्रभावित कर रहा है
➡ अगर सप्लाई जल्द नहीं सुधरी, तो आने वाले समय में
भंडारों की परंपरा भी प्रभावित हो सकती है
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