New Gorakhpur-Siliguri Expressway To Connect UP, Bihar & Bengal_Pic Credit Google

यूपी, बिहार से बंगाल तक बनेगा नया एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे को देगा टक्कर

भारत में सड़क कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने के लिए एक और मेगा एक्सप्रेसवे परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। Gorakhpur से Siliguri तक बनने वाला गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाला बड़ा हाईस्पीड कॉरिडोर होगा।

यह एक्सप्रेसवे भारतमाला परियोजना के तहत विकसित किया जा रहा है और इसे गंगा एक्सप्रेसवे के बाद देश के सबसे महत्वपूर्ण सड़क प्रोजेक्ट्स में माना जा रहा है।

519 किलोमीटर लंबा होगा एक्सप्रेसवे

गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई लगभग 519 किलोमीटर होगी। यह 6 लेन का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे होगा, जिसे भविष्य में 8 लेन तक बढ़ाया जा सकेगा।

इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 32 हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है।

तीन राज्यों के 12 जिले होंगे कनेक्ट

यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के 12 बड़े जिलों को जोड़ेगा।

उत्तर प्रदेश में इसका लगभग 84 किलोमीटर हिस्सा होगा, जो गोरखपुर, देवरिया और कुशीनगर जिलों से होकर गुजरेगा।

बिहार में इसका सबसे बड़ा हिस्सा करीब 416 किलोमीटर लंबा होगा। यह पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज जिलों से होकर निकलेगा।

पश्चिम बंगाल में करीब 19 किलोमीटर लंबा हिस्सा दार्जिलिंग जिले के सिलीगुड़ी में समाप्त होगा।

14 घंटे का सफर अब 6-8 घंटे में

फिलहाल गोरखपुर से सिलीगुड़ी तक सड़क मार्ग से पहुंचने में लगभग 14 से 15 घंटे लगते हैं।

लेकिन एक्सप्रेसवे बनने के बाद यह यात्रा महज 6 से 8 घंटे में पूरी की जा सकेगी। एक्सप्रेसवे पर वाहनों की अधिकतम गति 100-120 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।

बिहार और पूर्वोत्तर को मिलेगा बड़ा फायदा

यह एक्सप्रेसवे बिहार के तराई क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देगा। साथ ही व्यापार और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को भी मजबूती मिलेगी।

सिलीगुड़ी को “चिकन नेक कॉरिडोर” कहा जाता है, जो पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। ऐसे में यह परियोजना रणनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

युद्ध या आपातकाल की स्थिति में सेना और रसद की तेज आवाजाही में भी यह एक्सप्रेसवे मददगार होगा।

तेजी से चल रहा भूमि अधिग्रहण

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, देवरिया और कुशीनगर में भूमि अधिग्रहण का काम लगभग पूरा हो चुका है। बिहार में भी मुआवजा और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से चल रही है।

National Highways Authority of India ने कई हिस्सों के लिए टेंडर जारी कर दिए हैं और कुछ पैकेजों पर निर्माण की तैयारी भी शुरू हो गई है।

दूसरे एक्सप्रेसवे से भी जुड़ेगा नेटवर्क

यह एक्सप्रेसवे गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के जरिए पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। साथ ही भविष्य में बनने वाले शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे से भी इसकी कनेक्टिविटी होगी।

इससे उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार और बंगाल तक एक बड़ा हाईस्पीड सड़क नेटवर्क तैयार हो जाएगा।

निष्कर्ष

गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे उत्तर भारत की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में से एक बनने जा रहा है। इससे यात्रा समय कम होगा, व्यापार बढ़ेगा और तीन राज्यों की कनेक्टिविटी को नई रफ्तार मिलेगी।

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